लखनऊ, 15 नवम्बर 2025 उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान द्वारा गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘जनजाति भागीदारी उत्सव’ के तीसरे दिन देशभर की जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत की मनमोहक झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में उपस्थित उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने प्रदर्शनी और सांस्कृतिक मंच का अवलोकन किया तथा कलाकारों से संवाद कर उनकी कला-संरक्षण की प्रतिबद्धता की सराहना की।
उत्सव की शुरुआत ओडिशा की डुरुआ जनजाति की अद्भुत प्रस्तुति से हुई। प्रतिमा रथ के नेतृत्व में 16 कलाकारों ने विशेष दुरुआ पूजा के बाद होने वाली उस सांस्कृतिक परंपरा का मंचन किया, जिसमें दो बच्चे प्रतीकात्मक संघर्ष करते हैं, जिसने सभी का मन जीत लिया। वहीं, कश्मीर से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक संगीत और रूफ नृत्य शैली की शांतिदायक प्रस्तुति से समां बांधा। घाटी की लोकधुनों पर आधारित उनके गायन ने कश्मीर की सांस्कृतिक आत्मा का अनुभव कराया।

कलाकार की प्रस्तुतियों के क्रम में, राजस्थान के बहुरूपिया कलाकार शमशाद ने अलादीन के जिन का रूप धरकर मनोरंजन किया, जिसके संवाद पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा। रंजीश राणा के निर्देशन में 15 कलाकारों ने पीलीभीत का झींझी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें पारंपरिक गीतों और दीपकयुक्त मटके के साथ महिलाओं की प्रस्तुति ने प्रकृति और एकता का संदेश दिया।

असम से आए कलाकारों ने स्वागता शर्मा के निर्देशन में बोडो नृत्य के माध्यम से जनजाति की प्रकृति-प्रेम से जुड़ी भावनाओं को प्रदर्शित किया। इसके बाद, अमरजीत सिंह खरवार के नेतृत्व में सोनभद्र का कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया गया, जो मादल की धुन, समूहगत तालबद्धता और सावन की पूजा परंपराओं का जीवन्त प्रदर्शन था। अंत में, भंवरू खान लंगा एंड पार्टी ने मांड गायन प्रस्तुत करते हुए मोरचंग, ढोलक, खड़ताल, भपंग, सिंधी सारंगी जैसे वाद्यों की जुगलबंदी से वातावरण को लोकसंगीत की सुगंध से भर दिया।

कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, उपनिदेशक जे राम, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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