रविवार की सुबह थी। नीट (NEET) की परीक्षा देने आई एक छात्रा के चेहरे पर घबराहट और आंखों में आंसू थे। वह दौड़ती-भागती विभूति खंड इलाके में बने एक परीक्षा केंद्र पर पहुंची, लेकिन जैसे ही उसने वहां गेट पर मौजूद अधिकारियों को अपना एडमिट कार्ड दिखाया, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह गलत सेंटर पर आ चुकी थी। उसका असली परीक्षा केंद्र वहां से काफी दूर था। घड़ी की सुइयां तेजी से आगे बढ़ रही थीं। परीक्षा केंद्र के गेट बंद होने में चंद मिनट ही बचे थे। लखनऊ की ट्रैफिक और घटते समय को देखकर लड़की पूरी तरह टूट चुकी थी और रोने लगी। उसे लगा कि उसकी सालों की मेहनत आज एक छोटी सी चूक की वजह से बर्बाद हो जाएगी।

देवदूत बनकर आए पुलिसकर्मी उसी वक्त वहां मुस्तैद विभूति खंड पुलिस की टीम और सब-इंस्पेक्टर चेरियन सिंह की नजर उस रोती हुई लड़की पर पड़ी। मामला समझते ही उन्होंने एक सेकंड भी जाया नहीं किया।
बेटा, रोना बंद करो। तुम परीक्षा दोगी, यह हमारी जिम्मेदारी है।”
चेरियन सिंह ने तुरंत अपनी गाड़ी में लड़की को बैठाया और—”जितनी जल्दी हो सके, बिना वक्त गंवाए इसे सही सेंटर पर पहुँचाया


समय के खिलाफ एक दौड़ पुलिसकर्मियों ने खुद दौड़कर अधिकारियों से बात की और लड़की को समय रहते अंदर दाखिल कराया।जब वह छात्रा अंदर जा रही थी, तो उसकी आंखों में अब डर नहीं, बल्कि पुलिस के प्रति कृतज्ञता के आंसू थे। विभूति खंड पुलिस और चेरियन सिंह की इस तत्परता ने न सिर्फ एक छात्रा का साल बर्बाद होने से बचाया, बल्कि खाकी का वो मानवीय चेहरा भी पेश किया जो हमेशा याद रखा जाएगा।

By QMT NEWS

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