लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ का सबसे हाई-प्रोफाइल और पॉश इलाका माना जाने वाला ‘अंसल सुशांत गोल्फ सिटी’ इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। यहाँ रहने वाले लोग उस वक्त सन्न रह गए, जब यह बात सामने आई कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी वे जिस आशियाने में रह रहे हैं, उसकी बुनियाद ही नियमों को ताक पर रखकर रखी गई है। आरोप है कि अंसल के बिल्डर्स ने न सिर्फ मास्टर प्लान में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया, बल्कि सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों सहित आम जनता के हक की सरकारी सड़क को ही बेच डाला।

मास्टर प्लान में हेरफेर: सरकारी रास्तों पर खड़ी कर दीं इमारतें स्थानीय सूत्रों और राजस्व अभिलेखों के हवाले से जो बातें सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। जिस जमीन पर कभी सरकारी रास्ता या ग्राम समाज का मालिकाना हक दर्ज था, आज वहाँ बिल्डर की चमचमाती इमारतें और आलीशान बाउंड्री वॉल खड़ी हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी टाउनशिप में सरकारी रास्तों या सार्वजनिक भूमि का स्वरूप नहीं बदला जा सकता, लेकिन अंसल में मुनाफे के लिए सारे कायदे-कानूनों को मटियामेट कर दिया गया। सरकारी रास्तों को निजी संपत्ति में मिलाकर खरीदारों से मोटी रकम वसूल ली गई। इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन, एलडीए (LDA) और संबंधित विभागों की भूमिका पर उठ रहा है। आखिर इतने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण होता रहा और जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूंदे क्यों बैठे रहे? क्या इस महाघोटाले को रसूखदार बिल्डर्स और भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ का संरक्षण प्राप्त है?
जनता की शिकायतों को अब तक ठंडे बस्ते में क्यों डाला गया? जनता से सीधा सवाल:लाखों-करोड़ों रुपए लगाने के बाद भी क्या जनता सुरक्षित है? चंद पैसों के लालच में आपके और आपके बच्चों के हक की जमीन पर बिल्डर का यह अवैध कब्जा क्यों और कब तक बर्दाश्त किया

जाएगा?”खरीदारों में दहशत का माहौल इस खुलासे के बाद उन निवेशकों और खरीदारों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई इस उम्मीद में अंसल में लगाई थी कि उन्हें एक सुरक्षित, कानूनी रूप से वैध और व्यवस्थित माहौल मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मामले में कानूनी कार्रवाई होती है या बुलडोजर चलता है, तो गाज सीधे उन मासूम खरीदारों पर गिरेगी, जिन्हें बिल्डर ने अंधेरे में रखकर यह जमीनें और फ्लैट बेचे हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच, क्या लखनऊ जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस भू-माफियाई खेल के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाता है या फिर रसूख के दम पर इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।
